Story of doggy dhaba from zee business
₹1 लाख की सेविंग से खड़ा किया ₹5 लाख/महीने का 'डॉगी ढाबा': जानिए इंदौर के इस कपल की इंस्पायरिंग स्टोरी
आज के समय में पेट पैरेंटिंग (Pet Parenting) का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इसी ट्रेंड को पहचानकर इंदौर के रहने वाले बलराज और उनकी पत्नी ने शुरू किया 'डॉगी ढाबा' (Doggy Dhaba)। शुरुआत में लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन आज यह बिजनेस हर महीने 5 लाख रुपये से ज्यादा का टर्नओवर बना रहा है।
🍲 फ्रेश फूड से लेकर केक और बिरयानी तक!
डॉगी ढाबा में कुत्तों के लिए केवल सामान्य खाना ही नहीं, बल्कि खास डिशेज भी बनाई जाती हैं:
स्पेशल मेन्यू: डॉग-फ्रेंडली केक, बिरयानी, कुकीज़ और फ्रेश फूड।
डिलीवरी सुविधा: कुछ प्रोडक्ट्स सिर्फ इंदौर में और कुछ पूरे भारत में डिलीवर किए जाते हैं।
हेल्थ का पूरा ध्यान: डॉक्टर से सलाह लेकर तय किया गया मेन्यू। चीनी की जगह मामूली शहद का इस्तेमाल, ताकि डॉग्स को पूरा न्यूट्रिशन मिले।
🎉 अब डॉग्स के लिए भी होती हैं स्पेशल पार्टियां
बलराज ने पेट पैरेंट्स के लिए 'डॉग पार्टी' का अनूठा कॉन्सेप्ट शुरू किया है। इन पार्टियों में:
डॉग्स के लिए खाने-पीने का स्पेशल अरेंजमेंट होता है।
उनके मनोरंजन के लिए मजेदार गेम्स और एक्टिविटीज रखी जाती हैं।
🚀 शार्क टैंक और ग्लोबल ब्रांड बनने की तैयारी
करीब 4 साल पहले बूटस्ट्रैप्ड (Bootstrapped) तरीके से शुरू हुआ यह सफर अब बड़े स्केल पर जाने को तैयार है:
शार्क टैंक इंडिया (Shark Tank India): ब्रांड को मजबूत बनाकर शार्क टैंक में जाने की योजना।
फंडिंग की तलाश: बिजनेस विस्तार और सरकारी स्कीमों के तहत फंडिंग के लिए अप्लाई किया गया है।
विजन: भारत के हर शहर में डॉगी ढाबा खोलना और भारतीय पेट-फूड ब्रांड को विदेशों तक पहुंचाना।
"जब शुरुआत की तो लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन आज वही लोग तारीफ करते हैं।"— बलराज (फाउंडर, डॉगी ढाबा)